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एमएस डॉस क्या है और यह कैसे कार्य करता है

by Aniket Verma
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आप जानते हैं एमएस डॉस क्या है हर कम्प्यूटर चिपों, तारों आदि से बना होता है और उससे कोई काम कराने के लिए हमें पूरे और सही आदेश देने पड़ते हैं. ये आदेश किसी ऐसी भाषा में होने चाहिए जिसे कम्प्यूटर समझ सके. कम्प्यूटर वास्तव में केवल ऑपरेटिंग सिस्टम की भाषा समझता है. इसलिए हम अपने आदेश अपनी भाषा में कम शब्दों में ऑपरेटिंग सिस्टम को देते हैं, जिनको वह कम्प्यूटर की भाषा में बदल कर उसे भेज देता है. यदि हमारे और कम्प्यूटर के बीच में ऑपरेटिंग सिस्टम न हो तो हम कम्प्यूटर से कोई काम नहीं करा सकेंगे.

एमएस डॉस क्या है

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है (Disk Operating System या DOS)

हर छोटा-बड़ा कम्प्यूटर अपने ऑपरेटिंग सिस्टम के नियंत्रण में ही काम करता है. किसी भी कंप्यूटर के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम की जरूरत होती है. जो ऑपरेटिंग सिस्टम अपने काम में बार-बार डिस्क की मदद लेता है, उसे ही डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम या डॉस कहा जाता है. डॉस छोटे-बड़े हर तरह के कम्प्यूटर के लिए हो सकता है. आई. बी. एम. के पर्सनल कम्प्यूटरों के लिए माइक्रोसॉफ्ट नामक कम्पनी ने जो ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया, उसे पर्सनल कम्प्यूटर-डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Personal Computer Disk Operating System) या पीसी-डॉस (PC-DOS) कहा गया.

बाद में माइक्रोसॉफ्ट नामक कम्पनी ने सभी तरह के आईबीएम पीसी कॉम्पैटीबिल (IBM-PC Compatible) कम्प्यूटरों के लिए जो ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार किया, उसका नाम माइक्रोसॉफ्ट डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम या एमएस-डॉस (MS-DOS) रखा. यह एक बहुत ही लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्टम है. आजकल हर पीसी पर, चाहे वह किसी भी कम्पनी का हो, एमएस-डॉस ही पाया जाता है. यहां तक कि यदि किसी पीसी पर विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम है, तो उस पर भी एमएस-डॉस होता है और उसमें कार्य करने की सुविधा उपलब्ध होती है.

एमएस डॉस के कार्य (Functions of MS DOS)

कोई ऑपरेटिंग सिस्टम कितना अच्छा और ताकतवर है, यह इससे पता चलता है कि वह क्या-क्या काम कर सकता है. इनमें से कई काम ऐसे होते हैं, जो ऑपरेटिंग सिस्टम अपने आप ही (अर्थात हमारे कहे बिना) करता रहता है और बाकी कामों को हम आदेश देकर करा सकते हैं.

एमएस डॉस द्वारा अपने आप किए जाने वाले काम निम्नलिखित है

  1. की-बोर्ड से डाटा या आदेश प्राप्त करना.
  2. वी. डी. यू. पर परिणाम या सूचनाएं दिखाना
  3. कम्प्यूटर के हार्डवेयर (सी.पी.यू., मैमोरी, डिस्क आदि) के कामों पर नजर रखना..
  4. प्रोग्रामों के लिए मैमोरी में जगह बनाना.
  5. बाहरी उपकरणों या साधनों (Peripheral Devices) के कामों पर कण्ट्रोल रखना.
  6. नई फाइलें बनाना, पुरानी फाइलों को हटाना, फाइलों के नाम रखना आदि. 2. सभी फाइलों की सूची (List) बना कर देना.
  7. नई फ्लॉपी डिस्केटों को फार्मेट करना (यानी काम के लिए तैयार करना). 4. हार्ड डिस्क से फ्लॉपी पर फाइलों का बैकअप लेना.
  8. हार्ड डिस्क पर फाइलों को फिर से इस तरह लगाना कि उनके बीच कोई जगह बेकार न रहे. 6. हार्ड डिस्क को खाली कराना अर्थात् उस पर जगह बनाना.

एमएस-डॉस के आदेश (MS-DOS Command)

ऊपर बताए गए काम एमएस-डॉस को आदेश (Command) देकर कराये जाते हैं. हर काम के लिए एक विशेष आदेश होता है, जिसका एक निश्चित नाम भी होता है. वास्तव में ये आदेश उन छोट-छोटे प्रोग्रामों के नाम हैं, जो उन कामों को कराने के लिए ही लिखे गए हैं. उदाहरण के लिए, ‘COPY’ यह आदेश एक ऐसे प्रोग्राम का नाम है, जो किसी फाइल की दूसरी नकल (अर्थात् ठीक वैसी ही दूसरी फाइल) बनाने के लिए लिखा गया है. उस प्रोग्राम को चलाने के लिए एमएस-डॉस को COPY आदेश दिया जाता है. हर आदेश के साथ हम कुछ ऐसी जानकारी भी देते हैं, जो उस आदेश का पालन करने के लिए जरूरी है, जैसे COPY आदेश के साथ हमें यह बताना पड़ता है कि किस फाइल की नकल किस नाम से बनानी है.

उदाहरण :- COPY STUD1. TXT TEMP. TXT

इसमें ‘COPY’ आदेश का नाम है, जो सबसे पहले लिखा जाता है. इसके बाद लिखे गए शेष शब्द पैरामीटर हैं. यहां दो पैरामीटर हैं, जो दो फाइलों के नाम हैं. इस आदेश का अर्थ है कि ‘STUD1. TXT’ नाम की जो फाइल है, वैसी ही दूसरी फाइल दूसरे पैरामीटर ‘TEMP.TXT’ नाम से बना दो.

एमएस-डॉस का सारा काम आदेशों से होता है. कई आदेश बिना पैरामीटर के भी होते हैं और कई अन्य आदेशों में ज्यादा पैरामीटर भी हो सकते हैं. हर आदेश का अपना अलग रूप या व्याकरण (Syntax) होता है, जिसके अनुसार वह आदेश होना चाहिए. अगर कोई आदेश उसके व्याकरण के अनुसार नहीं है, तो एमएस-डॉस उसका पालन न करके उसे रद्द कर देता है.

एमएस-डॉस के संस्करण (Versions of MS-DOS)

आजकल हम जिस एमएस-डॉस का प्रयोग करते हैं, वह सबसे पहले सन् 1979 में 86-DOS के नाम से बनाया गया था, जो इन्टेल-8086 (Intel-8086) प्रोसेसर के लिए था. माइक्रोसॉफ्ट ने इसी को आधार बना कर आईबीएम-पीसी के लिए पीसी-डॉस (PC-DOS) नाम से एक ऑपरेटिंग सिस्टम निकाला. दूसरे कम्प्यूटरों के लिए इसी ऑपरेटिंग सिस्टम को एमएस-डॉस कहा गया. यह एमएस-डॉस का पहला संस्करण था. इसमें समय-समय पर सुधार होते रहते हैं और नए आदेश जोड़े जाते रहते हैं. अब तक इसके बहुत से संस्करण निकल चुके हैं,

हर नए संस्करण में पिछले संस्करणों के सभी आदेश तो रहते ही हैं, कुछ नए आदेश (यानी प्रोग्राम) भी जोड़े जाते हैं. परन्तु एमएस-डॉस के मूल ढांचे में कोई अन्तर नहीं आता. इस भाग में हम एमएस-डॉस 6.22 को ही आधार बनाएंगे, यदि आपके पास एमएस-डॉस का कोई दूसरा संस्करण है, तो कुछ आदेशों के नाम या व्याकरण में थोड़ा अन्तर हो सकता है. सही व्याकरण के लिए आपको एमएस-डॉस का मैनुअल (Manual) देखना होगा.

एमएस-डॉस प्रॉम्प्ट (MS-DOS Prompt)

पिछले भाग में आप पढ़ चुके हैं कि पीसी की बूटिंग हो जाने अर्थात् एमएस-डॉस रैम (RAM) में लोड हो जाने के बाद पीसी की स्क्रीन पर एक चिह्न दिखाई पड़ता है, जिसे कमान्ड प्रॉम्प्ट (Command Prompt) या एमएस-डॉस प्रॉम्प्ट (MS-DOS Prompt) या केवल ‘प्रॉम्प्ट’ कहा जाता है. इस प्रॉम्प्ट का रूप ज्यादातर ऐसा होता है

C : >

यहां ‘C: ‘ उस ड्राइव का नाम है, जिससे एमएस-डॉस लोड किया गया है. यह A, B या D भी हो सकता है. चिह्न ” प्रॉम्प्ट का पहचान चिह्न है. इसे आप अपनी इच्छा से रख और बदल भी सकते हैं. इसके बारे में आप आगे पढ़ेंगे. प्रॉस्ट के बाद छोटी पड़ी रेखा के रूप में कर्सर (Cursor) भी होता है, जो लगातार टिमटिमाता (जलता-बुझता) रहता है.

वी.डी.यू. स्क्रीन पर प्रॉम्प्ट दिखाई पड़ने और कर्सर के टिमटिमाने का अर्थ यह है कि एमएस-डॉस अगले आदेश के लिए तैयार है और अब आप नया आदेश टाइप कर सकते हैं. हर आदेश टाइप करने के बाद आप ‘रिटर्न’ या ‘एण्टर’ कुंजी को दबाते हैं. इससे वह आदेश पीसी में चला जाता है और उसी समय उसका पालन शुरू हो जाता है. इस आदेश का पालन पूरा हो जाने के बाद (या उसे बीच में ही खत्म कर देने के बाद) स्कीन पर प्रॉम्प्ट फिर उभर आता है, ताकि आप नया आदेश दे सकें.

प्रॉम्प्ट में जिस ड्राइव का नाम होता है, उसे वर्किंग ड्राइव या करन्ट ड्राइव (Current Drive) कहा जाता है, जैसे अगर प्रॉम्ट में ‘C:’ है, तो इसका मतलब है कि आप इस समय ड्राइव C में काम कर रहे हैं. इसलिए आप जो भी आदेश देंगे, उसे ड्राइव c के लिए ही माना जाएगा. उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपने किसी फाइल की नकल (COPY) करने का आदेश दिया, तो यह माना जाएगा कि फाइल ड्राइव C में है. यदि फाइल वहां नहीं है, तो आदेश बेकार हो जाएगा और स्कीन पर ‘फाइल नहीं मिली (File not found) का संदेश आ जाएगा.

आप अपना करन्ट ड्राइव बदल भी सकते हैं, मान लीजिए आप ड्राइव A पर आना चाहते हैं, तो यह आदेश दीजिये

C > A :

ऊपर वाला आदेश देने के बाद प्रॉम्प्ट इस प्रकार हो जाएगा

A : >

इससे पता चल जाता है कि अब ड्राइव A आपका करन्ट ड्राइव है.

कभी-कभी प्रॉम्प्ट इस प्रकार दिखाई पड़ता है

C : \ A >

इसमें करन्ट ड्राइव के साथ ही करन्ट डायरेक्टरी (Current Directory) का नाम भी दिखाया जा रहा है. यहां ‘C’ करन्ट ड्राइव का नाम है और १९ करन्ट डायरेक्टरी का (जो कि रूट डायरेक्टरी है), डायरेक्टरियों के बारे में आप आगे पढ़ेंगे. प्रॉस्ट में करन्ट डायरेक्टरी का नाम दिखाना या न दिखाना आपकी इच्छा पर है.

एमएस डॉस पर आदेश टाइप करना (Typing a Command)

ऊपर आप पढ़ चुके हैं कि एमएस-डॉस के प्रत्येक आदेश का अपना विशेष व्याकरण (Syntax) होता है. एमएस-डॉस को दिया जाने वाला प्रत्येक आदेश उसके व्याकरण के अनुसार होना चाहिए. यदि ऐसा नहीं है, तो डॉस उस आदेश को अस्वीकार कर देगा. कोई कार्य कराने के लिए सबसे पहले तो आपको यह देखना चाहिए कि उस काम के लिए कौन सा आदेश दिया जाएगा.

फिर उस आदेश के व्याकरण के अनुसार यह तय करना होगा कि आदेश में कितने पैरामीटर होंगे और वे क्या होंगे. उदाहरण के लिए, यदि आप एक फाइल की नकल करके दूसरी फाइल बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले आप यह याद करेंगे कि ऐसे काम के लिए COPY आदेश दिया जाता है. फिर उस आदेश के व्याकरण के अनुसार आप यह तय करेंगे कि इसमें दो पैरामीटर दिए जायेंगे एक, मूल फाइल का नाम और दूसरा, नई बनने वाली फाइल का नाम. यह तय कर लेने के बाद आप कमान्ड प्रॉम्प्ट पर आदेश टाइप करेंगे. सबसे पहले आदेश का नाम देंगे (यहां COPY). इसको आप बड़े या छोटे कैसे भी अक्षरों में टाइप कर सकते हैं. एमएस-डॉस के लिए COPY, Copy तथा copy सभी बराबर है.

इसके बाद कम से कम एक स्पेस छोड़कर पैरामीटर टाइप करेंगे. आदेश के नाम तथा पैरामीटरों के बीच में कम से कम एक-एक खाली स्थान होना जरूरी है. उदाहरण के लिए, यदि आप MYFILE.TXT की नकल करके ONECOPY.DOC नाम से नयी फाइल बनाना चाहते हैं, तो आदेश इस तरह होगा

COPY MYFILE.TXT ONECOPY. DOC

यदि कमान्ड टाइप करते समय कोई गलती हो जाए तो आप बैक-स्पेस (Backspace) कुंजी दबाकर अंतिम अक्षरों को मिटा सकते हैं और उनको फिर से टाइप कर सकते हैं या बायीं ओर के तीर के बटन को दबाकर कर्सर थोड़ा पीछे ला सकते हैं और गलती ठीक कर सकते हैं. आदेश पूरा टाइप हो जाने के बाद उसे कम्प्यूटर में भेजने के लिए एण्टर (Enter) कुंजी दबाई जाती है. यदि आपने आदेश सही दिया है तो उसका परिणाम भी सही प्राप्त होगा. यदि आदेश कोई काम ही न करे या इच्छित परिणाम न दे तो समझ लीजिए कि आदेश में कोई गलती रह गई है. अतः उसे ध्यान से देखकर ठीक करके फिर से देना चाहिए.

यह भी पढ़ें :- Best Shortcut keys of computer A to Z

एमएस-डॉस आदेशों के भेद (Types of MS-DOS Commands)

एमएस-डॉस के आदेश 2 प्रकार के होते हैं

  1. आन्तरिक आदेश ( Internal Commands)
  2. बाह्य आदेश (External Commands)

आन्तरिक आदेश :- ये ऐसे आदेश हैं, जो एमएस-डॉस की मुख्य फाइल कमान्ड प्रोसेसर Command.Com में पहले से भरे होते हैं, क्योंकि ये सबसे महत्वपूर्ण हैं और बार-बार देने पड़ते हैं. ये आदेश कम्प्यूटर की मुख्य मैमोरी में हर समय उपलब्ध रहते हैं तथा इन्हें चलाने के लिए किसी और फाइल की आवश्यकता नहीं होती है, इसलिए इन्हें आन्तरिक आदेश कहा जाता है.

बाह्य आदेश :- ये ऐसे आदेश है जो कम्प्यूटर की मुख्य मैमोरी में उपलब्ध नहीं रहते, बल्कि अलग प्रोग्राम फाइलों के रूप में डिस्क पर रहते हैं. जैसे ही आप कोई बाढ़ा आदेश देते हैं, कमान्ड प्रोसेसर उसकी सम्बन्धित फाइल को डिस्क पर ढूंढ़ता है और मिल जाने पर मैमोरी में लोड कर देता है. इसके साथ ही उस कमान्ड का पालन शुरू हो जाता है. इनको चलाने के लिए यह आवश्यक है कि इनका संस्करण वही होना चाहिए जो आपके एमएस-डॉस का है, नहीं तो ‘Incorrect Version’ अर्थात ‘गलत संस्करण’ का संदेश आएगा और आदेश रद्द हो जाएगा.

किसी भी पीसी पर सभी आन्तरिक और बाह्य आदेश दिए जा सकते हैं, परन्तु इस पुस्तक में हम कुछ अधिक महत्वपूर्ण आदेशों के बारे में ही विस्तार से बताएंगे. शेष आदेशों के बारे में जानने के लिए एमएस-डॉस का मैनुअल देखना चाहिए या HELP आदेश की सहायता लेनी चाहिए.

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