ऑटोमेटिक वोल्टेजस्टेबिलाइजरों में बहुत से कार्यों जैसे कि AC को DC में में बदलना, रिले चलाना, वोल्टेज ज्ञात करना इत्यादि के लिये सेमी कन्डक्टरों से बनी विभिन्न वस्तुएँ जैसे कि डायोड diode, ट्रांजिस्टर transistor, बाइरिस्टर thyristor आदि का प्रयोग किया जाता है। इनके सर्किट अध्ययन के पहले हम इन छोटी परन्तु शक्तिशाली वस्तुओं का अध्ययन करेंगे।
रेक्टिफायर डायोड Rectifier Diodes
सेमी कन्डक्टरों से बनी चीजों में सब से सरल चीज diode है। डायोड के दोनों सिरों पर एक-एक तार लगा होता है। ये सिरे Anode और Cathode के नाम से जाने जाते हैं। डायोड में विद्युत करन्ट एक ही दिशा में, यानि anode से cathode की ओर, ही बह सकती है। इस गुण के कारण डायोड AC को DC में परिवर्तित करने के लिये खूब काम में लाए जाते हैं। विभिन्न प्रकार anode का एक तार के निशान द्वारा और cathode को एक bar के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। तीर की दिशा डायोड में करन्ट बहने की दिशा दर्शाती है। विपरीत दिशा में वोल्टेज लगाने पर डायोड में करन्ट वहना रुक जाता है। और यदि यह वोल्टेज अत्याधिक हो तो डायोड जलकर या तो short-circuit या फिर open-circuit हो जाता है। सेमीकन्डक्टर डायोड अनेक प्रकार वोल्टेज और करन्ट की क्षमता के बनाये जाते हैं। उदाहरण के लिये 1N4001 और 1N4007 दोनों डायोडों की करन्ट क्षमता IA की है पर इनकी विपरीत दिशा में वोल्टेज सहने की क्षमता क्रमानुसार 50V और 1000V की है। बाजार में डायोड उनके टाइप नम्बर से मिलते हैं। डायोडों के टाइप नम्बर, क्षमता व अन्य गुण विस्तृत रूप से data manuals में दिये गए होते हैं।