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कंप्यूटर की संरचना और उसके मुख्य भाग

by Aniket Verma
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कंप्यूटर की संरचना क्या है कोई भी कम्प्यूटर चाहे छोटा हो या बड़ा, चाहे वह नया हो या पुराना, उसके पांच मुख्य भाग होते हैं जिन्हें हम इनपुट, आउटपुट, प्रोसेसर, मैमोरी तथा प्रोग्राम के नाम से जानते है. इन सब भागों के विषय में हमने आगे विस्तार से बताया है.

कंप्यूटर की संरचना

प्रोसेसर क्या होता है (what is processor)

कम्प्यूटर में जो भी कार्य किए जाते हैं, उन्हें करने वाले भाग या मशीन को ‘प्रोसेसर’ कहा जाता है. वास्तव में प्रोसेसर ही असली कम्प्यूटर है. कम्प्यूटर के बाकी भाग तो केवल उसकी सहायता करते हैं. प्रोसेसर ही कम्प्यूटर का दिमाग है. प्रोसेसर का काम है किसी व्यक्ति (या उपयोगकर्ता) द्वारा दिए गए आदेशों को समझ कर उनका ठीक-ठीक पालन करना, जोड़ना, घटाना आदि अंकगणितीय क्रियाएं, दो संख्याओं की तुलना (Comparison) करना है. तथा किसी विशेष बात की जांच करना आदि काम प्रोसेसर में ही किए जाते हैं. प्रोसेसर कंप्यूटर की संरचना का महत्वपूर्ण भाग है

बड़े कम्प्यूटरों में प्रोसेसर को सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) या सी.पी.यू. (C.P.U) कहा जाता है. इसके तीन भाग होते हैं-मैमोरी, ए.एल.यू तथा कन्ट्रोल मैमोरी कम्प्यूटर की भीतरी मैमोरी (Internal Memory) है. इसमें किसी भी समय चल रहे काम से संबंधित डाटा थोड़े समय के लिए रखा जाता है. यह मैमोरी वैसे तो प्रोसेसर का ही भाग होती है, परन्तु इसका बहुत महत्व होने के कारण हम इसके बारे में अलग से पढ़ते हैं. ए.एल.यू. (Arithmatic Logical Unit) में सभी तरह की गणनाएं और तुलनाएं की जाती हैं. कन्ट्रोल (Control) इकाई का काम होता है हमारे आदेशों को समझकर उनका सही-सही पालन कराना और कम्प्यूटर के सभी भागों पर नजर रखना और उन्हें नियंत्रित करना.

छोटे कम्प्यूटरों, जैसे माइक्रो कम्प्यूटर, पी.सी. आदि में प्रोसेसर या सी. पी.यू. को माइको-प्रोसेसर (Micro Processor) कहा जाता है. इस पूरी किताब में हम भी प्रोसेसर को ‘माइको प्रोसेसर’ ही कहेंगे.

मैमोरी क्या होता है (What is Memory)

जिस प्रकार हम अपनी स्मृति (Memory) में बहुत सी बातें याद रखते हैं, उसी तरह कम्प्यूटर के जिस भाग में सभी डाटा, प्रोग्राम आदि रखे जाते हैं, उसे कम्प्यूटर की मैमोरी कहते हैं. जैसा की मनुष्य के दिमाग और कम्प्यूटर की मैमोरी में बहुत अन्तर होता है. कम्प्यूटर की मैमोरी लाखों छोटे-छोटे खानों में बंटी हुई होती है. ऐसे ही हर खाने को बाइट (Byte) कहा जाता है. हर लोकेशन या बाइट पर एक विशेष क्रम संख्या पड़ी हुई मानी जाती है. उस संख्या को बाइट का पता (Address) कहा जाता है. यह ठीक वैसे ही है जैसे मकानों पर नंबर पड़े होते हैं. मेमोरी भी कंप्यूटर की संरचना का महत्वपूर्ण भाग होता है

हर बाइट आठ छोटी-छोटी बिटों (Bits) की एक श्रृंखला (Series) होती है. मैमोरी का सबसे छोटे हिस्से को बिट (Bit) कहा जाता है. बिट को आप एक छोटा बल्ब मान सकते हैं. जिस प्रकार कोई बल्ब या तो जल रहा होता है या बुझा होता है, उसी तरह कोई बिट या तो ऑन (On) होती है या ऑफ (Off). इस प्रकार किसी बिट की दो स्थितियां होती हैं-‘ऑन’ या ‘ऑफ’. इनके अलावा कोई तीसरी स्थिति नहीं हो सकती सुविधा के लिए हम ऑन बिट को 1 लिखते हैं तथा ऑफ बिट को ‘0’ लिखते हैं.

कम्प्यूटर में भरा जाने वाला डाटा 1 और 0 के रूप में ही कम्प्यूटर की मैमोरी में रखा जाता है और उसी रूप में उस पर सारा काम किया जाता है. काम करने के इस तरीके को बाइनरी सिस्टम (Binary System) कहा जाता है. कम्प्यूटर का सारा काम बाइनरी में ही चलता है.

किसी कम्प्यूटर की मैमोरी का आकार (Size) बाइटों की संख्या में नापा जाता है. कम्प्यूटर की मैमोरी जितनी बड़ी होती है, वह उतना ही शक्तिशाली (Powerful) माना जायेगा.

  • 1024 बाइटों को किलोबाइट (Kilobyte या K) कहते हैं.
  • 1024 किलोबाइटों को 1 मेगाबाइट (Megabyte या MB) कहा जाता है.
  • 1024 मेगाबाइटों को 1 जीगाबाइट (Gigabyte या GB) कहते है

. ध्यान दे :- कम्प्यूटर की मैमोरी प्रायः मेगाबाइटों या जीगाबाइटों में नापी जाती है.

कम्प्यूटरों की मैमोरी दो प्रकार की होती है

  1. भीतरी (Internal) या मुख्य (Main) मैमोरी
  2. बाहरी (External) या सहायक (Auxiliary) मैमोरी

भीतरी या मुख्य मैमोर :- कम्प्यूटर के प्रोसेसर या सी.पी.यू. का ही एक भाग होती है. किसी भी माइक्रो कम्प्यूटर या पी.सी की मुख्य मैमोरी का आकार 1 मेगाबाइट से 512 मेगाबाइट तक हो सकता है.

बाहरी या सहायक मैमोरी :- कम्प्यूटर की सी. पी.यू. से बाहर डाटा को लम्बे समय के लिए स्थायी रूप से स्टोर (Store) करने के लिए होती है. यह चुम्बकीय टेप (Magnetic Tape), हार्ड डिस्क (Hard Disk), फ्लापी (Floppy) आदि से बनी होती है. इसका आकार सैकड़ों-हजारों मेगाबाइटों और जीगाबाइटों में हो सकता है.

मुख्य मैमोरी को भी दो भागों में बांटा जाता है

  1. रैम (RAM)
  2. रोम (ROM)

रैम :- का पूरा नाम ‘Random Access Memory’ होता है, जिसका अर्थ है कि इस मैमोरी को हम अपनी इच्छा से कैसे भी प्रयोग कर सकते हैं. वास्तव में इसमें ऐसे डाटा और प्रोग्रामों को रखा जाता है, जिन्हें थोड़े समय तक रखना हो. यह डाटा तब तक वहीं बना रहता है, जब तक उसकी जगह पर कोई दूसरा डाटा नहीं रख दिया जाता या कम्प्यूटर बन्द नहीं कर दिया जाता. कम्प्यूटर बन्द (Off) कर देने पर रैम में रखा हुआ सारा डाटा गायब हो जाता है. कंप्यूटर की संरचना में रैम का भी महत्वपूर्ण भाग है

रोम :- का पूरा नाम ‘Read Only Memory’ होता है, जिसका मतलब है कि इस भाग में रखे डाटा को हम केवल पढ़ सकते हैं. वास्तव में इस भाग में कम्प्यूटर बनाने वाली कम्पनी द्वारा ऐसा डाटा और प्रोग्राम रखे जाते हैं, जिनकी हमें ज्यादा और रोज जरूरत पड़ती है. कम्प्यूटर की बिजली बन्द हो जाने पर भी रोम में रखा हुआ डाटा सुरक्षित बना रहता है. कंप्यूटर की संरचना में रोम का भी महत्वपूर्ण भाग है

इनपुट किसे कहते है (What is Input)

इनपुट किसी कम्प्यूटर का वह भाग है जिसके द्वारा हम अपना डाटा या आदेश या प्रोग्राम कम्प्यूटर को देते हैं. इनपुट इकाई में कई मशीनें या साधन (Devices) हो सकते हैं, जिनसे अलग-अलग तरह का इनपुट (डाटा या आदेश) कम्प्यूटर को दिया जा सकता है. इनपुट का सबसे अच्छा साधन है-की-बोर्ड (Key Board). यह टाइपराइटरों के की-बोडों जैसा ही होता है, हालांकि इसमें कुछ ज्यादा बटन होते हैं. हम इसमें लगे बटनों को दबा दबाकर अपना डाटा तैयार करते हैं और कम्प्यूटर में भेज देते हैं.

ध्यान दे :- की-बोर्ड के अलावा माउस (Mouse), जॉय-स्टिक (Joy Stick), लाइट पेन (Light Pen), स्पीकर (Speaker) आदि भी इनपुट के साधन हैं.

आउटपुट किसे कहते है (What is Output)

आउटपुट कम्प्यूटर के उस भाग को कहा जाता है, जिससे हमें अपने काम का परिणाम (Result) या उत्तर प्राप्त होता है. आउटपुट में कई मशीनें या साधन हो सकते हैं, जिनसे हमें कई तरह का आउटपुट मिलता है. आउटपुट का सबसे ज्यादा सरल और हर जगह पाया जाने वाला साधन है- वी. डी. यू. (Visual Display Unit). यह किसी टेलीविजन जैसा होता है, जिसके पर्दे (Screen) पर चिह्न या सूचनाएं दिखाई जाती हैं. छपी हुई सूचनाएं या रिपोर्ट देने के लिए प्रिंटर (Printer) या प्लाटर (Plotter) होते हैं. इनके बारे में आप आगे पढ़ेंगे.

वी. डी. यू. तथा की-बोर्ड को मिलाकर एक ऐसा साधन बन जाता है, जिससे हम इनपुट और आउटपुट दोनों का काम ले सकते हैं. इसे टर्मिनल (Terminal) कहा जाता है. इनपुट-आउटपुट के लिए टर्मिनल से ज्यादा सरल और अच्छा साधन दूसरा नहीं है. दुनिया भर में लगभग हर कम्प्यूटर में टर्मिनल अवश्य होता है.

यह भी पढ़ें :- कंप्यूटर का सामान्य परिचय और उसकी विशेषताएं

प्रोग्राम किसे कहा जाता है (what is the program called)

अनेक आदेशों के समूह (Group) को ‘प्रोग्राम’ कहा जाता है. ये ऐसे आदेश होते हैं और इस तरह से लिखे जाते हैं कि यदि कोई उनका सही-सही पालन करता जाए, तो कोई काम पूरा हो जाए. कम्प्यूटर जो सैकड़ों तरह के काम करता है, वे वास्तव में प्रोग्रामों के द्वारा ही कराए जाते हैं. हर काम के लिए एक अलग प्रोग्राम लिखा जाता है. प्रोग्रामों से ही कम्प्यूटर को ताकत मिलती है. प्रोग्रामों के बिना कम्प्यूटर केवल कुछ पुर्जों का ढेर है. बिना प्रोग्राम के कम्प्यूटर कोई काम नहीं कर सकता.

कम्प्यूटर कितने प्रकार के होते है (Types of Computers)

आकार और सुविधाओं के आधार पर कम्प्यूटर मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते है

  1. मैनफ़्रेम कम्प्यूटर (Mainframe Computer)
  2. मिनी कम्प्यूटर (Mini Computer)
  3. माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer)

मैनफ़्रेम कम्प्यूटर :- आकार में बहुत बड़े और काफी जगह घेरने वाले होते हैं. उनपर एक साथ सैकड़ों लोग काम कर सकते हैं. इनकी कीमत भी बहुत ज्यादा होती है. इस कारण बड़ी-बड़ी कम्पनियां ही उन्हें खरीद सकती हैं. आजकल ऐसे कम्प्यूटरों की संख्या बहुत कम रह गई है.

मिनी कम्प्यूटर :- आकार में मुख्य कम्प्यूटरों से छोटे होते हैं, परन्तु उनकी ताकत मुख्य कम्प्यूटर से ज्यादा कम नहीं होती. वास्तव में मिनी कम्प्यूटर ऐसी कम्पनियों के लिए बनाए गए हैं, जिनके पास कम्प्यूटर का काफी काम होता है, परन्तु वे मुख्य कम्प्यूटर नहीं खरीद सकतीं. मिनी कम्प्यूटर का मूल्य कम्पनियों की पहुंच के भीतर होता है. इन पर एक साथ 10-12 व्यक्ति काम कर सकते हैं. ये एक छोटे कमरे में आ जाते हैं. मिनी कम्प्यूटर ऐसा हर कार्य कर सकते हैं, जो मुख्य कम्प्यूटरों पर किया जा सकता है, आजकल मिनी कम्प्यूटरों की संख्या बहुत हो गई है.

सन् 1980 के बाद के वर्षों में ऐसी तकनीकें आईं, जिनसे कम्प्यूटर का आकार और भी छोटा हो गया तथा उनकी गति बढ़ गई. इससे माइक्रो कम्प्यूटर सामने आए. इनकी कीमत मिनी कम्प्यूटरों के मुकाबले में बहुत कम होती है और आकार में ये इतने छोटे होते हैं कि एक छोटी सी मेज पर आसानी से आ जाते हैं. इन पर एक बार में केवल एक आदमी काम कर सकता है.

माइक्रो कम्प्यूटर :- का ही दूसरा रूप पर्सनल कम्प्यूटर (Personal Computer) है. जिसे संक्षेप में ‘पीसी’ (PC) कहा जाता है. सबसे पहले इन्हें आई.बी.एम. कम्पनी द्वारा बनाया गया था. यह किताब मुख्य रूप से पीसी के बारे में ही है.

इन तीन तरह के कम्प्यूटरों के अलावा नए कम्प्यूटरों में ‘सुपर कम्प्यूटर’ भी हैं. ये अकेले ही कई मुख्य कम्प्यूटरों के बराबर होते हैं. इनका मूल्य भी करोड़ों में होता है. भारत में भी बहुत सारे सुपर कम्प्यूटर बनाए गए है.

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