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बिजली कैसे बनती है? और बिजली का उत्पादन कैसे होता है

by basegyan
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विद्युत ऊर्जा मानव जीवन के लिए इतनी आवश्यक हो गई है कि अब इसके बिना कार्य करना असंभव प्रतीत होता है। दुनिया के सभी उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली लगभग सभी मशीनें बिजली से चलती हैं। रेल, मोटर, कंप्यूटर, टेलीविजन इत्यादि इन सभी चीजों को विद्युत ऊर्जा की आवश्यकता होती है। बिजली हमारे लिए रोशनी पैदा करने का वरदान साबित हुई है। क्या आप जानते हैं कि बिजली कैसे बनती है?

बिजली कैसे बनती है

बिजली कहाँ से आती है और कैसे बनती है

बिजली उत्पन्न करने वाली मशीनों को डायनेमो या जनरेटर कहा जाता है। डायनेमो में एक विशाल चुंबक होता है, जिसके दो ध्रुवों के बीच घूमने वाले तांबे के तारों से बना एक आयताकार कुंडली होता है जो की चुम्बक के बिच घूमता है। इस कुण्डली के दोनों सिरे धातु के दो छल्लों से जुड़े हुए हैं। प्रत्येक वलय कार्बन ब्रश को छूता रहता है। बिजली ले जाने वाले तार कार्बन बुशिंग से जुड़े होते हैं। जब तांबे के तार का एक आयताकार कुंडली को चुंबक के ध्रुवों के बीच घुमाया जाता है, तो विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) द्वारा बिजली उत्पन्न होती है जो धातु के छल्ले को छूने वाले कार्बन ब्रश से विद्युत तारों तक जाती है। ये तार हमारे घरों और कारखानों में आते हैं। इस तरह बिजली हम तक पहुँचती है।

पानी से बिजली कैसे पैदा होती है

अब प्रश्न उठता है कि डायनमों में तांबे के तारों की कुण्डली को कैसे घुमाया जाता है? इसको घुमाने के लिए आमतौर पर दो तरीके काम में लाए जाते हैं। पहले तरीके में क्या आप जतने है की कि डायनमों में तांबे के तारों की कुण्डली को कैसे घुमाया जाता है? इसको घुमाने के लिए आमतौर पर बहुत से तरीके काम में लाए जाते हैं। उसमे से पहला तरीका है टरबाइन नदियों पर बांध बनाकर पानी को बहुत ऊंचाई से गिराया जाता है। यह पानी टरबाइन के ब्लेडों पर गिरता है जिससे इसकी घरी घमने लगती है। टरबाइन की धुरी का सम्बन्ध जेनरेटर की कुण्डली के धुरे से होता है। टरबाइन के चलने से यह कुण्डली भी घूमने लगती है और बिजली पैदा होने लगती है। इस प्रकार से विद्युत पैदा करने वाले केन्द्रों को जल विद्युत केन्द्र (hydel power Station) कहते हैं। भारत में 197 हाइड्रो पावर प्लांट हैं।

कोयले से बिजली कैसे बनती है

आइये जानते है की कोयला जलाकर बिजली कैसे बनाया जाता है सबसे पहले कोयला जलाकर पानी गर्म किया जाता है। फिर पानी से बनी भाप को टरबाइन के ब्लेडों पर डाला जाता है जिससे टरबाइन घूमने लगती है। टरबाइन का सीधा सम्बन्ध डायनमो से होता है जिससे तांबे के तारों की कुण्डली चुम्बक के ध्रुवों के बीच में घूमने लगती है और इस तरह कोयले से बिजली पैदा होने लगती है। इस प्रकार के केन्द्रों को ताप विद्युत केन्द्र (Thermal Power Station) कहते हैं। बदरपुर और दिल्ली में ऐसे ही पावर स्टेशन हैं। जिनमें कोयला जलाकर से बनी भाप से जेनेरेटरों द्वारा विद्युत उत्पादन होता है।

सौर ऊर्जा को बिजली में कैसे बदला जाता है

सूर्य के प्रकाश से बिजली कैसे बनाई जाती है आइये जानते है। सूर्य के प्रकाश से बिजली बनाने के लिए सोलर पैनल का प्रयोग किया जाता है सूर्य से निकलने वाली किरणों में पाए जाने वाले कणों को फोटॉन कहते है। सौर पैनलों में फोटोवोल्टिक सेल होते हैं जो सिलिकॉन से बने होते हैं। जब फोटोवोल्टिक सेल पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है, तो फोटॉन की ऊर्जा अवशोषित हो जाती है और ऊपरी परत में पाए जाने वाले इलेक्ट्रॉन सक्रिय हो जाते हैं। धीरे-धीरे यह ऊर्जा पूरे पैनल में प्रवाहित होने लगती है और इस प्रकार सौर ऊर्जा से बिजली का उत्पादन होता है। इस प्रकार के केन्द्रों को सौर ऊर्जा स्टेशन (Solar Power Station) कहते हैं।

परमाणु ऊर्जा से बिजली कैसे बनती है

आजकल परमाणु ऊर्जा से भी बिजली पैदा की जा रही है। परमाणु ऊर्जा से भी बिजली पैदा करने के लिए पावर प्लांट में ईंधन के रूप में यूरेनियम इस्तेमाल किया जाता है 1 किलो यूरेनियम से लगभग 2700 क्विंटल कोयले जितना ऊर्जा निकलता है। इनको परमाणु विद्युत केन्द्र (Atomic Power Reactors) कहते हैं।

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