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इंसानों का खून अलग-अलग तरह का क्यों होता है? और ब्लड कितने प्रकार के होते है

by Aniket Verma
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सभी मनुष्यो का खून देखने में तो एक जैसा लगता है परन्तु वास्तव में यह एक जैसा होता नहीं है। मुख्य रूप से हमारा खून लाल रक्त कण (Red Blood Corpuscles), श्वेत रक्त कण (White Blood Corpuscles), प्लेटलेट्स (Platelets) और प्लाज्मा (Plasma) से मिलकर बना है। सूक्ष्म परीक्षणों से पता चलता है कि बहुत से व्यक्तियों के खून के लाल रक्त कणों की सतह पर अलग-अलग प्रकार के एन्टीजन (Antigen) नामक पदार्थ के अणु होते हैं। एन्टीजन के अणु एक प्रकार के प्रोटीन होते हैं। एन्टीजन के इन अणुओं की भिन्नता के कारण अलग-अलग इंसानों का खून अलग-अलग हो जाता है।

इंसानों का खून

ब्लड ग्रुप कितने प्रकार का होता है

ब्लड ग्रुप कितने प्रकार का होता हैसन् 1900 में डाक्टर कार्ल लैन्ड स्टीनर (Dr. Karl Land Steiner) ने A और B दो प्रकार के एन्टीजनों का पता लगाया। इस अनुसन्धान पर उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार दिया गया। जिस व्यक्ति के रक्त में A प्रकार के एन्टीजन होते हैं उसका खून A ग्रुप का कहलाता है और जिसके खून में B प्रकार के एन्टीजन होते हैं। उसका खून B ग्रुप का कहलाता है। बाद में पता चला कि कुछ व्यक्तियों के रक्त में A और B दोनों ही प्रकार के एन्टीजन एक साथ होते हैं। ऐसे रक्त को AB ग्रुप का नाम दिया गया। जिन व्यक्तियों के खून में A और B कोई भी एन्टीजन नहीं होता उसके रक्त को O ग्रुप का नाम दिया गया। इस प्रकार सभी मनुष्यों के खून को A, B, AB और O चार वर्गों में बांट दिया गया।

कौन सा ब्लड ग्रुप किसको खून दे सकता है

नोट :- किसी भी रोगी को रक्त देने से पहले उसके रक्त ग्रुप का परीक्षण जरूरी है। एक सगे भाई-बहन का खून भी अलग-अलग हो सकता है और दो अलग-अलग जातियों के दो व्यक्तियों का खून भी एक जैसा हो सकता है।

A ग्रुप का रक्त A और AB ग्रुप वाले व्यक्तियों को दिया जा सकता है। AB ग्रुप का रक्त केवल AB ग्रुप के रक्त वाले प्राणी को ही दिया जा सकता है। O ग्रुप का रक्त O, A, B और AB ग्रुप वाले किसी भी रोगी को दिया जा सकता है। O ग्रुप को यूनीवर्सल डोनर (Universal donor) कहते हैं। इसी प्रकार A ग्रुप वाला प्राणी O और A से, B ग्रुप वाला B और O से, O ग्रुप वाला O से और AB ग्रप वाला व्यक्ति O. A, B और AB किसी से भी रक्त प्राप्त कर सकता है। AB ग्रुप को यूनिवर्सल रिसेप्टर (Universal Receptor) कहते हैं। क्योंकि इस वर्ग के रक्त वाले प्राणी को किसी भी ग्रुप का खून दिया जा सकता है।

यह भी पढ़ें :- हमारा शरीर गर्म क्यों रहता है? और शरीर को गर्मी कैसे प्राप्त होती है

यदि व्यक्ति को गलत प्रकार का रक्त दे दिया जाए तो क्या होगा

यदि गलती से एक गलत ग्रुप का रक्त किसी रोगी को दे दिया जाए तो रोगी की मृत्यु हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि अलग-अलग वर्गों के एन्टीजन एक दूसरे से मिल नहीं सकते। यदि केवल रक्त का प्लाज्मा ले लिया जाए तो वह किसी को भी दिया जा सकता है क्योंकि रक्त का प्लाज्मा सभी का एक जैसा होता है। अतः इंसानों का खून देने से पहले ग्रुप मिलाना अत्यन्त आवश्यक है।

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